Friday, April 20, 2012

प्रथम प्रभाव The First Impression

मैं नहीं जनता कि मैं कैसे और क्यों श्री कृपालु जी महाराज से प्रभावित हुआ. मैं तो अपने को एक नास्तिक मानता आया था. हाँ यह अवश्य था कि मुझे ज्ञान की खोज थी. हर प्रकार के ज्ञान की. चाहे वह संगीत हो, नाटक, चित्रकारी अथवा कविता. सन 1996  में चंडीगढ़ से ग़ाज़ियाबाद ट्रान्सफर होने पर मैं बिलकुल खुश नहीं था. कहाँ चंडीगढ़, साफ, सुथरा, सुसंस्कृत लोग और कहाँ ग़ाज़ियाबाद! उस समय झुग्गी झोपड़ियों से भरा, क्रिमिनल एरिया. कम से कम संस्कृति के लिए तो ग़ाज़ियाबाद जाना ही नहीं जाता था. फिर किसी सभ्य व्यक्ति को उस शहर से भला क्या आशा होती? लेकिन जीवन में अत्प्रत्याशित मोड़ आना ही तो ज़िन्दगी कहलाती है! तो इस शहर ने एक नहीं कई अप्रत्याशित मोड़ दिखलाये जिसकी चर्चा धीरे धीरे होती रहेगी. अभी जतना ही.

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